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बरसों-से फैले रेगिस्तान में आखरी बूँद उम्मीद कीकि कोई आएगा मरिचिका को पार कर अपने हाथों में प्रेम का पानी लिए और मैं उसे अपनी आँखों में भर लूँगी कि मिलन की अंतिम घड़ी में लब सूखे भी हो तो चलेगा आँखों से नमी नहीं जानी चाहिए.................
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