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आँखों की नमी


बरसों-से फैले रेगिस्तान में
आखरी बूँद उम्मीद की
कि कोई आएगा मरिचिका को पार कर
अपने हाथों में प्रेम का पानी लिए

और मैं उसे अपनी आँखों में भर लूँगी
कि मिलन की अंतिम घड़ी में
लब सूखे भी हो तो चलेगा
आँखों से नमी नहीं जानी चाहिए.................

प्रतिक्रियाएँ

Re: आँखों की नमी
जो मैं केहना चाहता हूँ आपकी कविता कह देती है| कविता की आखरी लाईन में जो शर्त लगयी है वो बहुत अछी है|
अस्वीकरण