प्रेम एक बच्चे की ड्राँइंग कॉपी जैसा, पेंसिल और रंगो को हाथ में लेकर उसके जो मन में आता है बनाता है, उसमें तरह-तरह के रंग भरता है। उसकी कल्पना को कोई नहीं पकड़ सकता। वो चाहे तो जोकर बना दे, चाहे तो हाथी, चाहे तो एक छोटा-सा घर और आसमान में उड़ती ...
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