ज़िन्दगी सहूलियतों का खेल नहीं
क़िस्मत के हाथों लिखी कोशिशों की वसीयत है
जिस पर परिणाम के हस्ताक्षर नहीं
ज़िन्दगी बिछड़े हुओ का मेल नहीं
इंतज़ार की ज़मीं पर
मीलों चलने वालों के हाथों में
पहचाने से पतों की कतरन है
जिस पर शहर का नाम नहीं
ज़िन्दगी दो पटरियों पर चलती रेल नहीं
पैदल चलने वालों के पैरों में बीछी सडकें हैं
जो चुपके से पगडंडियों पर उतर आती है
और ज़िन्दगी तेरी क़िस्मत से
मेरी रेखाओं का मेल नहीं
मैंने ज़माने से छुपाकर रखे लम्हों की कहानी है
जिसमें जुदाई की दास्तां उतर आती है

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