एक दिन यूँ ही तन्हा रातों के अंधियारो से उजालों का पता पूछ लिया मेरी डायरी के पन्ने फड़फड़ाने लगे, उनींदी सी नज़रो से तेरे घर के पते को देखा और कब आँख लगी पता न चला , सुबह सूरज की किरणों को अपने पंखो में समेट कर उम्र की तितली को खिड़की से आते हुए देखा, ...
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