एक गैस स्टव, चार बर्तन, कुछ सब्जियाँ और मसाले.........इतना ही काफी होता है शायद कोई भी डिश बनाने के लिए...नहीं? यदि हाँ तो फिर माँ के हाथों में ऐसा क्या जादू है, जो हॉटेल के शेफ के हाथों में नहीं? हॉस्टेल में रहनेवाले स्टूडेंट्स को अपने टिफिन के बजाय दोस्त की माँ के हाथ के पराठे क्यों पसंद आते हैं? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह जानता है कि माँ ने बनाते समय अपनी ममता उसमें उड़ेली है। इसलिए ऐसे कई होटेल बहुत प्रसिद्ध हो जाते हैं, जिनका खाना इतना अच्छा नहीं होता जितनी सर्विस।
मेरी दो बेटियाँ हैं और खाने में दोनों की पसंद अलग-अलग। सुबह का समय स्कूल, ऑफिस की भागा-दौड़ी, टिफिन, खाना और ब्रेकफास्ट, सुबह का समय पूरा किचन में।
लेकिन उन दोनों को खिलाने में जो मज़ा है वो और किसी चीज में नहीं।
रोज़ नई डिश बनाना तो संभव नहीं, लेकिन हाँ एक ही डिश को दो तरीके से परोसने से ही मेरा काम चल जाता है। एक को सैंडविच पसंद है दूसरी को रोल।
अब बनाइए आलू की सूखी सब्जी (आलू और भींडी की सब्जी बच्चों की पसंदीदा होती है, चाहे किसी भी तरीके से बनाइए), ब्रेड की दो स्लाइस, सॉस, प्याज, टमाटर और सेंव (इन्दौरियन्स की फेवरेट), बटर, हरी चटनी। ब्रेड की एक स्लाइस पर हरी चटनी लगाइए, दूसरी स्लाइस पर बटर, फिर आलू की सब्जी, कटे प्याज, टमाटर, सॉस और सेंव दोनों स्लाइस के बीच भरकर प्रेस कर दीजिए। हो गया सैंडविच तैयार। अब वही आलू की सब्जी को मैदे की रोटी में भरकर वही सारी सामग्री डालकर रोल कर दीजिए। हो गया रोल तैयार।
दोनों खुश...और बच्चे खुश तो हम भी खुश।

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