कई दिनों से चेहरा नहीं देखा
लेकिन शायद खुशी ऐसी ही होती है
कनखियों से झाँकती है
कभी लबों को चूमती है
मैं झूम जाऊँ दुपट्टे में
तो मेरे गले लिपटती है
इठलाती है मेरी चूड़ियों में
मेरी पायल में खनकती है
एक चेहरे से दूसरे चेहरे में
छुपकर मुझसे उलझती है
एक खुशी है
जो बयां नहीं होती
लेकिन तन्हाइयों में गूँजती है
कभी सवाल बनकर अड़ जाती है
कभी जवाब बनकर मचलती है
वो खुशी है खुश रहती है
मेरे गम चुराकर चुप रहती है
मैं कहूँ तो होंठों पर हाथ धर देती है
और खुद आँखों से बयां कर देती है
चाँदनी बनकर आँगन में
तो धूप बनकर आँखों में खेलती है
जीवन की नदिया में
छपछपाती लहरों-सी बहती है
मेरे दामन में मोती-सी
मेरे नैनों में ज्योति-सी
खामोशी का गीत बनकर अधरों पर सोती है
कई दिनों से चेहरा नहीं देखा
लेकिन शायद खुशी ऐसी ही होती है

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