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ज़िंदगी के सपने

बहुत बडे नही होते ज़िंदगी के सपने

बस नींदे कम पड जाती है

ज्यादा की ज़रूरत नही होती, कम समय में ही मुश्किले गुज़र जाती है



तेरा होना ही काफी होता तो इस जहान में कहीं भी हो सकता था तू

तेरा मेरे साथ होना, हथेली में कुछ लकीरें और जुड जाती है,



कभी बहकाती है मुझको कभी सम्भाल लेती है

ख़फा हो जाऊं, तो मना भी लेती है

क्या कहूं और ए दोस्त तेरी दोस्ती ज़िन्दगी आसान कर जाती है,



बहुत बडे नही होते ज़िंदगी के सपने

बस नींदे कम पड जाती है

प्रतिक्रियाएँ

Re: ज़िंदगी के सपने
एक ख़्वाब जो देखते हैं हम ज़िंदगी के किसी मोड़ पर अक्सर हमसे टकराता है कभी ओस की बूँदों जैसा, कभी मिट्टी की ख़ुश्बु जैसा तो कभी किसी दोस्त के साथ जैसा. मेरी दुआ है हमेंशा हँसते रहो क्योंकि कुछ लब मुस्कुराते हुए ही अच्छे लगते हैं. और कुछ आँखों में नमी अच्छी नहीं लगती
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