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5 नवंबर, 2007


ब्लॉग्स (2)
बहुत बडे नही होते ज़िंदगी के सपने बस नींदे कम पड जाती है ज्यादा की ज़रूरत नही होती, कम समय में ही मुश्किले गुज़र जाती है तेरा होना ही काफी होता तो इस जहान में कहीं भी हो सकता था तू तेरा मेरे साथ होना, हथेली में कुछ लकीरें और जुड जाती है, कभी बहकाती है ... आगे पढ़ें...

आकर्षण की सीमा के परे जब मैं तुम्हें सोचती हूं तो तुम मुझे दिखाई देते हो मेरी रात के चन्द्रमा की तरह जो मेरे अंतःसागर में हो रहे ज्वार-भाटे को नियंत्रित किये हुए भी तटस्थ रहता है अपने आसमां में, विचारो की सीमा से परे जब मैं तुम्हें सोचती हूं तो तुम मुझे ... आगे पढ़ें...