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शेरो-शायरी

बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो
चार किताबें पढ़कर वो भी हम जैसे हो जाएँगे
- निदा फाज़ली
सहरा में मेरे हाल पे कोई भी न रोया
बस फूट के रोया तो मेरे पांव का छाला
- नजीर अकबराबादी

इस जिंदगी में और मुसीबत कोई नहीं
खुद जिंदगी हुई है मुसीबत कभी-कभी

- आनंद नारायण मुल्ला

कभी खुशी से खुशी की तरफ नहीं देखा
तुम्हारे बाद किसी की तरफ नहीं देखा

- मुनव्वर राना

मैखाना-ए-हस्ती में अक्सर, हम अपना ठिकाना भूल गए
या होश से जाना भूल गए, या होश में आना भूल गए
- अदम
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