चार किताबें पढ़कर वो भी हम जैसे हो जाएँगे
- निदा फाज़ली
सहरा में मेरे हाल पे कोई भी न रोया
बस फूट के रोया तो मेरे पांव का छाला
- नजीर अकबराबादीइस जिंदगी में और मुसीबत कोई नहीं
खुद जिंदगी हुई है मुसीबत कभी-कभी
- आनंद नारायण मुल्ला
कभी खुशी से खुशी की तरफ नहीं देखातुम्हारे बाद किसी की तरफ नहीं देखा
- मुनव्वर राना
मैखाना-ए-हस्ती में अक्सर, हम अपना ठिकाना भूल गएया होश से जाना भूल गए, या होश में आना भूल गए
- अदम

लोड हो रहा है...