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1 नवंबर, 2007


ब्लॉग्स (1)
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारें छूने दो चार किताबें पढ़कर वो भी हम जैसे हो जाएँगे ---------निदा फाज़ली सहरा में मेरे हाल पे कोई भी न रोया बस फूट के रोया तो मेरे पांव का छाला - नजीर अकबराबादीइस जिंदगी में और मुसीबत कोई नहीं खुद जिंदगी हुई है मुसीबत कभी-कभी - आनंद नारायण मुल्लाकभी खुशी से खुशी की तरफ नहीं देखा तुम्हारे बाद किसी की तरफ नहीं देखा - ... आगे पढ़ें...