तुम सच के धरातल पर खड़े किसी महात्मा की मूरत की तरह जिसको लोग नमस्कार कर आगे बढ़ जाते हैं एक और झूठ बोलने के लिए, मैं कल्पना के आसमान में उड़ती अदनी-सी चिड़िया। तुम सच के विकृत रूप को निडरता से स्वीकार करने वाले रोशनी से भरपूर दिन मैं सपने के सच हो जाने के ...
और पढ़ें...168 views. 3.0 rating from 2 votes.